प्रयागराज-वर्ष 2018 से पुलिस हिरासत से गायब युवक के बरामद न करने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी,10 दिन दिया समय

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वर्ष 2018 से पुलिस हिरासत से लापता युवक के बरामद करने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। साथ ही यूपी पुलिस को 10 दिन का समय दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 2018 में हिरासत से लापता युवक की पुलिस तलाश कर रही है, यह मजाक के सिवा कुछ नहीं है। अगर कोई अनहोनी हुई है तो उस समय के एसपी को बख्शा नहीं जाएगा। डीजीपी ने इस मामले में हलफनामा प्रस्तुत किया पर कोर्ट पुरी तरह से असंतुष्ट रहा। कोर्ट ने बंदी को खोजने के लिए 10 दिन का अंतिम समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। बस्ती के पैकौलिया थाना क्षेत्र निवासी लापता शिव कुमार के पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनके बेटे को एक लड़की का अपहरण करने के आरोप में उठाया था और तब से उसका कोई पता नहीं है। सितंबर 2018 में युवक को पुलिस ने हिरासत में लिया था और इंस्पेक्टर ने आश्वासन दिया था कि लड़की का बयान दर्ज होने के बाद उसे रिहा कर दिया जाएगा। बाद में लड़की ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया कि वह स्वेच्छा से घर से गई थी। इसके बावजूद उनके बेटे का पता नहीं चला पाया। अदालत में 28 नवंबर को डीजीपी राजीव कृष्ण ने हलफनामा देकर बताया कि गोरखपुर जोन के एडीजी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई है। हालांकि, अदालत इस जवाब से पूरी तरह असंतुष्ट रही। कोर्ट ने पुलिस को बंदी को खोजने के लिए 10 दिन का समय दिया है। स्पष्ट किया कि जवाब केवल तीन तरीकों से दिया जा सकता है। बंदी को पेश करके या उसके मृत्यु के सबूत देकर या यह दिखाकर कि वह देश छोड़ चुका है। कोई चौथा विकल्प नहीं चलेगा। अब नौ दिसंबर को मामले की दोबारा सुनवाई होगी।
UP TIMES NEWS
Author: UP TIMES NEWS

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