कोडीनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप की सप्लाई में एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह का नाम सामने आया है। एसटीएफ आलोक की तलाश में दबिश दे रही है। हालांकि, अभी तक वह उसे पकड़ नहीं सकी है। सूत्रों का कहना है कि जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और मिर्जापुर समेत कई जिलों में एसटीएफ ने छापा मारा, लेकिन आलोक का सुराग नहीं लगा। पड़ताल में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए अमित सिंह टाटा के साथ मिलकर आलोक ने भी अपनी फर्म बनाई थी। आलोक की फर्म से भी नशीले कफ सिरप की सप्लाई की गई थी। उसकी फर्म से लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। इस मामले से जुड़ा का एक पन्ना शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अमित और आलोक ने विकास सिंह के माध्यम से शुभम जायसवाल और उसके पार्टनर वरुण सिंह, गौरव जायसवाल और विशाल मेहरोत्रा से बात की थी। सभी के कहने पर दोनों ने जनवरी 2024 में फर्म बनाई थी। फर्म का सारा लेनदेन शुभम, वरुण और उनका सीए देखता था। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में अमित ने बताया है कि धनबाद में उसने और आलोक ने पांच-पांच लाख रुपये लगाए थे। इसके एवज में अमित और आलोक को करीब 22 लाख रुपये मिले थे। कफ सिरप की सप्लाई के लिए दोनों कई बार धनबाद भी गए थे। धनबाद का काम वरुण देखता था। आरोपियों ने नशे के इस कारोबार से लाखों रुपये कमाए हैं।
वाराणसी में भी खोली थी फर्म
सूत्रों के मुताबिक गिरोह के कहने पर आलोक और अमित ने अपने-अपने नाम से वाराणसी में भी फर्म खोली थी। आलोक ने मां शारदा मेडिकल के नाम से फर्म बनाई थी। वाराणसी की फर्म में आरोपियों ने दो-तीन माह ही कोडीनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप का व्यापार किया था। आरोपी सारा लेनदेन नकद में करते थे। वाराणसी में दोनों को करीब आठ लाख रुपये का मुनाफा हुआ था। अमित इन रुपयों को अपनी पत्नी के खाते में जमा कर देता था। टीमे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।